मीरजापुर।
ब्रह्माकुमारीज द्वारा 6 से 20 अगस्त तक चलाए जा रहे “10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाभियान” के अंतर्गत मीरजापुर में विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। की ओर प्रेरित करना है। ब्रह्माकुमारीज मीरजापुर की सेवा केंद्र प्रभारी बीके बिंदु दीदी जी एवं सहयोगी बहनों-भाइयों द्वारा विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि नशा व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक शक्ति को कमजोर करने के साथ-साथ उसके परिवार, संस्कार, शिक्षा और भविष्य को भी प्रभावित करता है।
राजयोग एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वयं पर नियंत्रण, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है तथा कार्यक्रम के अंत में सभी को आजीवन नशामुक्त रहने की दृढ़ प्रतिज्ञा भी कराई जा रही है।
अभियान के अंतर्गत अब तक 5 शिक्षण संस्थानों में लगभग 2,350 छात्र-छात्राओं ने नशामुक्त जीवन जीने का संकल्प लिया। इनमें 8 अगस्त को शिव इंटर कॉलेज मीरजापुर में 150 विद्यार्थी, 10 अगस्त को आदर्श इंटरमीडिएट कॉलेज बिसुन्दरपुर में 1,000 विद्यार्थी, माता प्रसाद माता भीख इंटर कॉलेज घंटाघर में 200, तथा 11 अगस्त को राजस्थान इंटर कॉलेज में 800 छात्र-छात्राएं शामिल रहे। इसके साथ ही जीडी बिनानी पीजी कॉलेज के लगभग 200 विद्यार्थियों ने भी आजीवन नशामुक्त रहने का संकल्प लिया।
कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता के रूप में बीके बिंदु दीदी, बीके रूपाली, बीके नीति, बीके दिव्यानी, बीके दिव्या एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी वीरेंद्र सिंह मरकाम द्वारा विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया। सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का कार्यक्रमों के आयोजन में सराहनीय सहयोग रहा।
इसी क्रम में ब्रह्माकुमारीज एवं भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से “गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन” विषय पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को वरिष्ठजनों के सम्मान, उनकी सेवा तथा उन्हें वृद्धाश्रम भेजने के बजाय परिवार में प्रेम और सम्मान के साथ रखने की प्रेरणा दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि बुजुर्ग हमारे अनुभव और संस्कारों की जीवंत पाठशाला हैं; उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन से ही परिवार एवं समाज संस्कारवान बनता है।
ब्रह्माकुमारीज मीरजापुर द्वारा यह अभियान आगे भी विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सामाजिक संस्थाओं में जारी रहेगा, ताकि अधिक से अधिक युवा नशे से नहीं, बल्कि ज्ञान, योग, संस्कार और आत्मबल से जुड़कर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएं और स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण में सहभागी बनें।





